My New Poem...!!!!
ज़हन में बादल ग़मोंके काले छा जाते हैं
किसी अपनेके अचानक बिछड़ जाने से
ख़्यालों तसव्वुर के हर द्वार खुल जातें हैं
बिछड़े हूएँ शख़्स की झलक पाने को
वक़्त रहते क़दरों क़ीमत न कर पाते हैं
ख़ूनके ऑसु बहाते जहाँसे गूजर जाने पे
वह रब भी तब ही सब्र को आज़माता हैं
जब ग़मों से दिल के ग़मज़दा हो जानें पे
गंगा-जमनी अश्रुओं की धारा बहती हैं
किसी ख़ास अपनेके साथ छोड़ जाने पे
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