किसी को काँटों से चोट पहुंची
तो किसी को फूलों ने मार डाला
जो इन मुसीबतो से बच निकले उन्हें उसूलों ने मार डाला
जिसे कहिये वजहे सुरूर क्या
वो विरासतो पे गुरूर क्या
जो डगर मिली वो लूटी हुई
जो दिया मिला वह बुझा हुआ
कुछ ख़ाब थे मेरे जहन में
जो मैं न कह सका न लिख सका
की ज़बा मिली तो कटी हुई
और कलम मिला तो बिका हुआ
- बेनाम का नही
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