વૉ હર બાર છીપાતા થા મુજસે અપના સચ...
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वोह हर बार छिपाता था मुझसे अपना सच..।
पर मेरी भी नज़र भला कहा थी कमजोर..।।
अश्क के पीछे भी मेरी चाहत का मुजे गरूर... ।
पर वोह कहा समज पाया मेरी चाहते हजूर...।।
जाना मैने जब उसकी बेवफाई का सफर..।
बैठ गया ये♥️ दिल मुझपे हुआ ऐसा असर..।।
जब पूछा मैने उससे इस खता की वजह..।
पर सामना न कर पाया वो मेरी नज़र...।।
हुवे जाने से फिर अनजान दोनों हम..।
गिरे आंख से अश्क जब टूटा मन का भरम..।।