क्यू डूब गया सूरज मेरा क्या फिरसे वहीं सुबह लाएगा क्या , क्यू रूठा है चांद मुझसे मेरा क्या फिरसे रातोमे रोशनी लाएगा क्या , क्यू तोड़ दिया मुझे एसा क्या में फिर से खुदको जोड़ पाऊंगा क्या , क्यू दूर हुआ मुझसे एसा की वो फीरसे मुझे मिलपाएगा क्या , करलूंगा इंतजार उसका क्या फीरसे कभी अपनी आवजसे मुझे पुकार पाएगा क्या , उसकी आंखे थी नशीले शराब जैसी क्या फिरसे नशा चढ़ा पाएगी क्या , तोड़ दूंगा सबसे रिश्ते नाते क्यावो मुझे अपना बना पाएगा क्या , क्यू आते है सपनों में मेरे क्या फिरसे हकीकत बन पाएंगे क्या ,
। कबतक करूंगा इंतजार उसका क्या ये इंतजार भी ख़तम हो पाएगा क्या ।
यादे..