#કામ
ना तो पद काम आया ।
ना तो प्रतिष्ठा काम आई ।
आखिर अपनी समजदरी काम आई।...१
ना तो अपने काम आए ।
ना तो पराए काम आए।
आखिर में एक साधूता काम आई।....२
ना तो धर्म काम आया।
ना तो कर्म काम आया।
आखिर में जीवन का मर्म काम आया ।...३
ना तो शिक्षा काम आई।
ना तो दीक्षा काम आई।
आखिर में अपनी अनुभूति काम आई।...४
ना तो संन्यास काम आया ।
ना तो उपन्यास काम आया ।
आखिर में अपनी गृहस्थी काम आई।....५
ना तो श्रम काम आया ।
ना तो आश्रम काम आया।
आखिर में अपनी विश्रांति काम आई ...५
ना तो वेद काम आया।
ना तो भेद काम आया ।
आखिर में अपनी संवेदना काम आई।...७
ना तो मेहनत काम आई।
ना तो जेहमत काम आई ।
आखिर में अपने गुरु की रेहमत काम आई।...८
ना मोती काम आया ।
ना हीरा काम आया।
आखिर में अपनी तुलसी की माला काम आई।...९
ना तो शिक्षक काम आया
ना तो प्रोफेसर काम आया।
आखिर में अपना सदगुरु काम आये।...१०
ना तो युक्ति काम आई।
ना तो मुक्ति काम आई।
आखिर में अपनी भक्ति काम आई।...११
ना तो राजा काम आया ।
ना तो प्रजा काम आई।
आखिर में अपनी ईमानदारी काम आई।...१२