My New Poem...!!!!!
लूटा चूकें है हम बहुत कुछ
अपनी फ़ानी ज़िंदगी में यारों
अब हमारे दिल के जज़्बात
को तो ना लूटों जो हम सिर्फ़
लिख कर ही बयान करते हैं ..!!
यारों ज़ख़्मों से शिखा हैं हमने
अपने दर्द में भी पनपने का हुनर,
अब तो दिल के तार एसे न छेड़ो
साज़ जो हम लफ़्ज़ों से बजाते हैं..!!
बढ़ते बढ़ते बढ़ ही जाती हैं रिश्तों
में दरारें दे जाती हैं जो मन में घाव
बढ़ती दरारों को एसे ही बढ़ने न दो
अहंम को मात दे के ही रिश्ते बचाते है.!
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