वो आएंगे मुझसे मिलने,
ऐसा समझाया है दिल ने,
वो कब आए मुझसे मिलने,
जब दिल को यह समझाता हूं।।
मैं विचलित सा हो जाता हूं।।
बीती बातें, बीते सपने,
कौन मनाए ॽ रूठे अपने,
आ जाए बस दिल ही रखने,
मैं एकाकी घबराता हूं।
मैं विचलित सा हो जाता हूं।।
जीवन कोई खेल नहीं है,
बालकपन की रेल नहीं है,
दिल दिमाग का मेल नहीं है,
जब दोनों को टकराता हूं।
मैं विचलित सा हो जाता हूं।।
##प्रदीप ##
#विचलित