My New Poem...!!!
“””””””” मंज़र “””””””””
अभी है जो नज़र 🧿 के सामनें मंज़र
ग़ौरतलब है कि रहता कब तक मंजर
ज़हन के ख़्यालों से ओझल होता मंजर
पल पल हर एक पल में बदलता मंजर
अभी आँसू अभी खुशी ग़ज़ब है मंजर
देता तनाव तो देता ख़्वाब भी तो मंजर
देता एहसास तो दिलाता ग़ुस्सा मंजर
कैसे कैसे दौर से गूजर बनता है मंजर
राई के दाने-सी कीकी में समाता मंजर
प्रभु भी उपर बैठे कितने संवारता मंजर
कितने मारता कितने नए प्यदा है मंजर
रोते मौत पे तो ख़ुशी औलाद के मंजर
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