महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐💐
अबला -अबला कहकर
क्यों मुझे पछाड़ रहे हो
मेरा वजूद मिटाकर तुम
क्यों अपना घर उजाड़ रहे हो
ये अबला तुम से आगे होंगी
दिल की अपनी करने तो दो
आसमानों को छूते इरादों को
चारदीवारी में घुटकर मरने ना दो
आंखें ना दिखाओ तुम
नजरिया बदल कर तो देखो
शान में चार चांद लग जाएंगे
साथ चल कर तो देखो
नारी बिन ना वजूद तुम्हारा
फिर गुमान किस बात का तुम्हें
एक काम भी औरत बिन ना बने
क्या पता नहीं अपनी औकात का तुम्हें
उतार फेंको बोझ औच्छी सोच का
आखिर कब तक यूं लिए फिरोगे
उस दिन अक्ल तुम्हें आ जानी है
'ओमदीप' जिस दिन औंधे मुँह गिरोगे।।
✍️✍️ ओमदीप वर्मा
बीकानेर (राज.)