ये कैसे जुडे तार तुझसे,
उलझ के रह गए,
उन मैं हम जैसे...
खुद से ही वास्ते तोड़ दिए सारे,
जुड़ी डोर लम्हों की ऐसे,
दूर हो कर भी पास हो तुम जैसे...
इतना सताओ ना, इतना याद आओ ना,
मेरे आंशु वो सारे,
बन जाए हंन्जु हो खारे...
हसरते है,
नुमाइसे है,
तुम्हें चाहने की सिर्फ ख्वाहिशें है...
दूरियां है,फासले है,
हमारे दरमियान जमाने के लिए
कुछ फैसले है..
तुम कोई जरूरत या जख्म नही,
जो समय के साथ,
भरता जाए...
तुम तो वो एहसास हो,
जो वक़्त के साथ बढ़ता जाए,
और बढ़ता जाए...