ख़ुशी ?
सिखना
समझना
जानना
लालसा
चिंतन
मनन
सृजन
ये सब ख़ुशियाँ ही तो है जो हर उस इच्छा को जो हम अपने दिल के बंद कमरे में दबाए रहते है, को प्रेरित करते है जिससे हमें इस बदलते परिदृश्य को दूसरे की आँखो से नहीं बल्कि स्वयं के नज़रिए से देखने का मौक़ा मिलता है.
ख़ुशी ही तो है