अब बीच की धुँध हटनी चाहिए
मन का युद्ध मिटना चाहिए
बुद्ध जीवित हों, दिखने चाहिए
आज की धुँध मिटनी चाहिए।
मन और ऊँचा उठना चाहिए
गंगा और पवित्र होनी चाहिए,
हमारी सूरत बदलनी चाहिए
अब शब्द निर्भय होने चाहिए।
कृष्ण खड़े कहीं मिलने चाहिए
दहकता सूरज रहना चाहिए
अंधेरी रात मिटनी चाहिए
अब जीवन की धुँध हटनी चाहिए।
**महेश रौतेला