तन्हा ये मन
तन्हा है मन
सुन धड़कन तुम कहां हो,
सूना ये तन
उन बाहों का न अहसास हो ।
भीगी ये पलकें
बस अश्कों का ही स्वाद हो,
काली हैं रातें
डर गये, चुप का साथ हो ।
कहां है कोई
पर मरना भी न रास हो,
जन्म बीता न सोई
सर रख, उस गोदी की आस हो ।
मजबूर मेरा दिल
उन होंठों पे मुस्कान हो,
ह्रदय से न मिल,
बुन दर्द वो हजार हो ।
प्यासा है प्यार
मेरे होने का महत्व हो,
क्यों हूं मैं यहां
मेरे सम्मान का कुछ हक हो ।
तन्हा है मन
सुन धड़कन तुम कहां हो ।।