My New Poem...!!!
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जो मनुष्य दूसरों की पीड़ा को
देख कर व्यतीत हो जाएँ
उस से उत्तम ओर काबिल कोई
मनुष्य हरगिज़ नहीं❗️
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परमात्मा भी कभी किसी का
भाग्य ख़ुद नहीं लिखतें
जीवन के हर कदम पर हमारी
सोच हमारा व्यवहार और
हमारे रोज़मर्रा के कर्म ही हमारा
भाग्य खुद लिखते हैं ❗️
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सौ मनुष्य को चाहिए कि अपने
रोज़ाना की दिनचर्या में
ग़ैरों की पीड़ा में सहभागी बन कर
पीड़ित की तीव्रता कम करे❗️
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साथ ही कमँ की करनी सो भी प्रभुकी
मर्ज़ी को कमँ से रिझाते रहे
फिर तो भाग्य खुद ही चल कर आप
कि मुक्तिबोध को अंजाम दे ...❗️❗️
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