लिव-इन रिलेशनशिप (लेख)
अति स्वतंत्रता, विकृत मानसिकता व उच्छृंखला का घिनौना रूप लिव इन रिलेशनशिप है। हमारे युवा विदेशों का अनुसरण करते हुए यह भूल जाते हैं कि पाश्चात्य संस्कृति के लोग धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं। वह लोग जिन चीजों का त्याग करते हैं, हम उन्हीं चीजों को बिना सोचे समझे झपटने की कोशिश करते हैं। उदाहरणार्थ एकल परिवार , फास्ट फूड, छोटे कपड़े, प्लास्टिक आदि।
विवाह संस्था हमारे देश की पहचान है। यह कोई बंधन नहीं है अपितु समाज, परिजनों के आशीर्वाद से एक दूसरे के भावनाओं को समझ, प्यार विश्वास, त्याग समर्पण से परिपूर्ण बहुत ही प्यारा नाता है। यह केवल लड़का लड़की तक ही सीमित नहीं अपितु उनके परिवारों को भी आपस में जोड़ उनके प्रति भी जिम्मेदारी का एहसास कराता है।
इसके विपरीत लिव इन रिलेशनशिप में साथ रहकर भी लड़का-लड़की एक दूसरे से दिल से कभी जुड़ नहीं पाते और ना ही एक दूसरों की भावनाओं को समझ पाते क्योंकि उनका रिश्ता प्यार पर नहीं करार पर टिका है । यह एक उपभोक्तावादी संबंध है। जिसमें एक दूसरे को उपभोग की वस्तु समझा जाता है। जिसका आधार पहले इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें है!अगर समझ ना आए तो छोड़ दे ।
यह विश्वास शायद ही इन दोनों के मध्य कभी पनप पाए। जिम्मेदारियों से भागने का दूसरा नाम लिव इन रिलेशनशिप है।
सरोज ✍️