जय श्री राधे
*✍कोई सराहना करे या*
*निंदा*
*लाभ अपना ही है*
*कारण..*
*प्रशंसा प्रेरणा देती है*
*और निंदा*
*सुधरने का अवसर..!!*
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*✍जिसके साथ बात करने से ही*
*खुशी दोगुनी*
*और*
*दुख आधा रह जाये,*
*वो ही अपना है..*
*बाकी तो बस दुनिया है..!!*
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*✍इंसान का स्वभाव कुछ इस तरह हो रहा है..*
*जो लेकर जाना है, उसे छोड़ रहा है..*
*जो यहीं रह जाना है, उसे जोड़ रहा है..!!*
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*✍आपकी सोच ही*
*आपको बड़ा बनाती है..!!*
*यदि हम गुलाब की तरह*
*खिलना चाहते है तो*
*काँटों के साथ तालमेल की*
*कला सीखनी होगी..!!*
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*✍मानव देह ही वह*
*एक मात्र रथ हैं,*
*जिस पर सवार होकर*
*" आत्मा "* *परमात्मा*
*तक पहुँच सकती हैं..!!*
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*✍स्मरण के पन्नो से भरा है जीवन,*
*सुख और दुःख कि पहेली है जीवन*
*कभी अकेले बैठ कर,*
*चिंतन करके तो देखो,*
*संबंधों के बगैर अपूर्ण है जीवन..!!*
*🙏🏼🙏🏿🙏 जय सियाराम जी*🙏🏽🙏🏻🙏🏾