इस उथल पुथल ने बच्चों को भी इतना हस्सास बना दिया है कि जो बच्चे गांधी, नेहरू अम्बेडकर और संविधान का नाम तक नहीं जानते थे आज वो उनके नाम के नारे लगा रहे हैं। जिस जामिया, JNU और AMU का नाम बच्चे ग्रेजुएशन तक नहीं जानते थे वो आज वहां जा कर स्टडी करने का सपना देख रहे हैं क्योंकि वहां से हक की आवाज़ उठती है। आवाज़ उठती है गरीबों की, मज़लूमों की, पीड़ितों की दलितों की और हर पीड़ित वर्ग की।
इस आंदोलन का सबसे बड़ा फायदा मुस्लिम कौम को होगा कि अब वो अपने बच्चे बच्चियों को आला तालीम से नहीं रोकेंगे। कबाब, टिक्के, बिरयानी, पंचर की दुकान खुद लगा लेंगे लेकिन अपने बच्चों को तालीम देंगे हर हाल में। और अब वो अपने बच्चों को गली-मोहल्ले और चौराहों की ज़ीनत नहीं बनने देंगे और न ही कमउम्र में उनसे पढ़ाई छोड़कर काम करने को कहेंगे।
यही इस आंदोलन का हासिल होगा मुस्लिम कौम के लिए😊👍👍
जय हिंद
(नोट- बच्चों की वर्डिंग्स में प्रॉब्लम हो सकती है लेकिन बच्चा समझकर माफ कर् दें और उनके मन की व्यथा और उनके भविष्य पर शांत मन से आत्ममंथन करें)