मुझे स्नेहिल सान्निध्य चाहिए
मुझे स्नेहिल सान्निध्य चाहिए
ईश्वर की लम्बी दृष्टि चाहिए,
सूरज की थोड़ी रश्मि चाहिए
जाड़ों की खिसकती धूप चाहिए।
मन पर बिखरा सुविचार चाहिए
तन पर ओढ़ा वस्त्र चाहिए,
कोयल की लम्बी कूक चाहिए
गीता की एक पंक्ति चाहिए।
महाभारत की लम्बी कथा चाहिए
अर्जुन सा अद्भुत वीर चाहिए,
कृष्ण सा खड़ा सारथी चाहिए
सावित्री सी निडर वेदना चाहिए।
रामायण सा महाकाव्य चाहिए
राम के भीतर आनन्द चाहिए,
मुझे स्नेहिल सान्निध्य चाहिए
हरिश्चन्द्र की सत्य कथा चाहिए।
गौतम सा पूर्ण ज्ञान चाहिए
रघुकुल की नीति चाहिए,
मन में जलता दीप चाहिए
मुझे स्नेहिल सान्निध्य चाहिए।
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**महेश रौतेला