लोकनीति न चातिप्रणयः
कार्यः कर्त्तव्योप्रणयश्च ते,
उभयं हि महान् दो
सस्त स्मादन्तर दृग्भव।।
भावार्थ :- मृत्यु-पूर्व बालि ने अपने पुत्र अंगद को यह अन्तिम उपदेश दिया था कि तुम किसी से भी सीमा से अधिक प्रेम या अधिक वैर न करना... क्योंकि दोनों ही अत्यन्त अनिष्टकारक होते हैं, सदा मध्यम मार्ग का ही अवलम्बन करना।
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