Hindi Quote in Story by Rajesh Maheshwari

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पाश्विकता

मैं प्रतिदिन सुबह घर के बगीचे में आकर बैठ जाता था। वह एक बंदर था, जो नियमित रूप से उसी समय प्रतिदिन आकर याचनापूर्वक दोनो हाथों से मानो निवेदन करता हुआ बिस्किट माँगता था। मैं भी सहर्ष उसको बिस्किट देकर प्रसन्नता का अनुभव करता था। वह शांतिपूर्वक बिस्किट खाकर चला जाता था।
एक दिन मैं बीमार हो गया, वह नियत समय पर आया, मैंने खिडकी से उसे बिस्किट दे दिया, उसने उसे लेकर बिना खाए संभालकर खिडकी के पास ही रख दिया। मैं तीन दिन तक बीमार रहा, वह प्रतिदिन तीन चार बार आकर खिडकी से मुझे देखकर वापस चला जाता था। मेरा स्वास्थ्य ठीक होने पर मैं वापस बगीचे मैं बैठने लगा। वह भी प्रसन्नचित्त होकर छिपाए हुए बिस्किट को खाकर चला गया। मैं अपने प्रति उसका व्यवहार देखकर आश्चर्यचकित था कि जानवर भी कितने संवदेनशील होते है।
एक दिन वह रक्तरंजित अवस्था में बडी मुष्किल से लँगडाकर चलते हुए मेरे पास आया और बेहोश होकर गिर पडा। किसी ने उस पर पत्थर किया था, जिससे वह बुरी तरह जख्मी हो गया था। हम उसे तुरंत अस्पताल ले गए। जहाँ डाॅक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मैं दुखी मन से उसके बहते हुए रक्त में मानवीय क्रूरता का अट्ठहास महसूस कर रहा था एवं अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि देकर चुपचाप वापस घर आ गया। आज भी जब वह घटना याद आ जाती है, तो मैं द्रवित हो जाता हूँ और मनुष्य की पाश्विकता को नही भूल पाता।

Hindi Story by Rajesh Maheshwari : 111327081
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