सुदंर रचना ..
फूल सी है नाजुक वो ,सब के दिल को महका जायें ।
चाँद सी सुदंर हैं वो ,सब की आँखों में बस जायें ।।
प्रेम सी है मूरत है वो ,सबके दिलों में समा जायें ।
भाई की जाया है वो ,सबके मन को अति हरषायें ।।
माँ की लाड़ली है वो ,सब ओर अति छा जायें ।
पिता की प्यारी है वो ,सब ओर उजाला कर जायें ।।
संस्कारों की देवी है वो ,एक पल में हाजिर हो जायें ।
राखी बांध कर वो ,अपना रिश्ता निभा कर जायें ।।
प्राणों सी प्यारी है वो ,जुदा होने पर रुला जायें ।
एक पल दूर हो तो वो ,अपनी याद दिला जायें ।।
कभी कुछ नही मांगे वो ,हर पल आशिष दे जायें ।
विधाता की अनमोल कृति है वो ,कभी दिल से दूर न हो पाये ।।
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