तेरी लीला
मांगा था प्यार, पर वोह उनसे नहीं मिला ;
नसीब में लिखी थी तन्हाई, तो किससे करे हम गीला !!!
ईर्षा, नफ़रत का चलता ही रहा सिलसिला ।
ऐ साकी, प्यासे को तूही आज जाम पीला;
नशेमें कुछ पल मिले चैन; देखे तेरी भी लीला !
बहुत चाहा पर हमें तो अपना कोई भी न मिला !
Armin Dutia Motashaw