आज सुबह का सुविचार सत्य वचन ब्रह्मदत्त
एक 'ऊ' की मात्रा ने पूरी जिंदगी की चलती लाईनों को ही बदल दिया... संस्कारों को पैसे का गुलाम बना दिया पहले "आयु" का सम्मान होता था... अब "आय" का सम्मान होता है...
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
पहले "आयु" में बडों का सम्मान होता था..!
अब "आय" में बड़े का सम्मान होता है... !!
पैसे की खातिर गैरो को भी बना लेते हैं अपना रिश्तेदार भी....
गरीबी में सब कतराते हैं उन रिश्तो से... जो होते हैं खास भी....ब्रह्मदत्त