मेरी मौजूदगी का एहसास तुझको दिलाऊं कैसे,
तू जिन्दगी है, जिन्दगी को धड़कनें सुनाऊँ कैसे,
वैसे तो बात होती है खुदा से, हर रात ही मगर ,
तू मुकद्दर में ही नहीं, तुझे पाऊँ तो पाऊँ कैसे..!!
✍️ गीता परमार
-- Parmar Geeta
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