अब जब भी उसकी याद आती है..ख़ामोश हो जाता हूँ,
दिल को समझा कर कही और ले जाता हूँ....
आँखो को भी गुमराह करना पड़ता है ,
आँसुओ को झूठ बोलकर फुसला लेता हूँ..,.
उसके चेहरे को अनजाने रंगो से रंगना पड़ता है,
हाँ...अब उसकी बातों को होंठों से दबा लेता हूँ...
उसकी तस्वीरों को छिपा रखा है ख़ुद से ही,
उसके एहसास को लफ़्ज़ों में पिरो देता हूँ..,,
अब जब भी उसकी याद आती है.......
-A A राजपूत ‘अक्श’