वो चाँद की तरह शांत था …
और वो सूरज की तरह तेज ।
वो सुखा रेगिस्तान था …
और वो बारीश की गीली बूंदो की तरह ।
वो तेज धूप में ठंडी लहर की तरह …
और वो आसमान को छूती ठंडी लहर की तरह ।
जो अब तक था सपना मेरा ...
आज वो हकीकत में सामने मेरे आया है ।
आज तक बस ख्वाबों में ही ...
कुछ इस तरह सजाया था मेने ।
जैसे पानी मे अंगारे की तरह ।
Dr.Divya