My New Poem...!!!
शायरी तो एक बहाना है इरादा
तो आपका एक लम्हा चुराना है
आप हमे याद करो या ना करो
हमे तो आपके ख़यालोमें आना है
गुज़रता वक़्त भी तौफ़िक देता है
मुन्तज़िर वक़्तके रहते सँभलते है
मरासिम तो हर दौर में पनपते है
मौँतबर तो ख़ुदमें खुदको खौजे है
मँझिल पर ही कश्तीऑ डूबती है
मँझिलसे मँझिलका पता पाना है
जग के साथ हम चल तो रहे है पर
“रुँह”जी जगको चलाता कोन है..??
तौफिक=शक्ति, सामर्थ्य, हिम्मत, हौसला.
मुन्तज़िर=प्रतीक्षा करनेवाला,
मरासिम=customs, rules, relations
मौतबर=एतबार, भरोसेमंद, विश्वसनीय
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