दहशत
"अर्जुन! आज तुम निक्की को स्कूल से ले आओ.." मनीष ने ड्राइवर से कहा और यह सुनकर उसकी पत्नी नीता बदहवास सी किचन से दौड़ती हुई आयी और बोली...
"रुको, मैं भी चलती हूँ।"
"क्यों...? मेहमान आने ही वाले हैं और तुम्हारा घर पर रहना जरूरी है। निक्की अर्जुन के साथ आ जाएगी।" मनीष के मना करने के बावजूद नीता कार में बैठ गयी और ड्राइवर से चलने को कहा।
मनीष की गुस्से से घूरती दो आँखे उसकी पीठ पर बहुत दूर तक और बहुत देर तक चुभती रहीं, किन्तु इससे भी ज्यादा चुभ रहा था... वह घिनौना स्पर्श। उस गन्दी मानसिकता के स्पर्श की याद से ही पाँच वर्षीय बेटी निक्की की माँ नीता आज भी असहज हो जाती है। तब वह मात्र पाँच वर्ष की थी और उसके मम्मी पापा शॉपिंग के लिए जाते वक़्त मार्केट की भीड़ भाड़ में समय बचाने की खातिर कई बार उसे ड्राइवर अंकल के साथ पार्किंग प्लेस पर कार में छोड़ जाते थे।
©डॉ वन्दना गुप्ता
मौलिक
(22/09/2018)