My New Poem ...!!!
मत कराओ हमें इन्तजार
इतना की वक्त के फैसले
पर अफ़सोस हो जाऐं...
कहीं ऐसा ना हो कि आते आते
इतनी देर हो जाए कि तु आऐ
और हम खामोश हो जाऐं ....
गुजरते वक़्त की दहलीज़ पर
दस्तक तो देता है फ़िक्र का हर
लम्हा आवाज़ भी देता हैं ज़मीर..
माटी के ढाँचे में बैठा एहसास दिलाए
ख़्याल जौ भी आए जाए ज़हन में परखे
बारीकिसे छलनी से छल जताए तासीर
दूधका दूध पानीका पानी कर दे पल में
जताते हूए तुझ को बताए सत्य पल में
मानना ना मानना है तेरे अख़्तियार में..
प्रभु की लीला अपरंपार रास रचे है
खेल ख़ेलें बैरी वह बेठ तेरे ही मन में
जता के सच-जूठ वह परखें है तुझ में
बाँवरा काँवरिया बनाएँ तुझे दौलत का
फिर खींचें तुझे चित-भ्रमसे अपनी और
मनवा में जिसके वह बसा देखे ना और
अजीब रास-रचयिता है वह कान्हा जी
ख़ुद ही बहकावत और खुद ही सँभालत
मुझ दासनुँ हरि-दर्शन करावत जीते जी
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