Hindi Quote in Shayri by GOPESH KUMAR

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जाने क्यों हँस कर मुझसे मिलने लगें हैं लोग सारे।
जाने किस ग़लत फ़हमी में जीने लगे हैं लोग सारे।

जाने क्या रोग लग गया है सारे शहर की आँखों को,
क्यों खामियों में खूबियाँ ढूंढने लगे हैं लोग सारे।

तारीफ करें किसी की, ये तो इनकी फितरत नहीं,
फिर क्यों कर मेरे मुरीद होने लगे हैं लोग सारे।

सख्त नफरत है जिन्हे अपने से ऊँची इमारतों से,
क्यों मेरे घर के सामने झुकने लगे हैं लोग सारे।

कपड़ों से आदमी की हैसियत तौलते है जो जनाब,
क्यों मुझ नाचीज़ से रिश्ता रखने लगे हैं लोग सारे।

कबसे अपना खैरख्वाह हो गया ये शहर अजनबी,
क्यों राह चलते खैरियत पूछने लगे हैं लोग सारे।
गोपेश कुमार शुक्ल

Hindi Shayri by GOPESH KUMAR : 111304942
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