My New Poem..!!!!!
गुनाह कुछ ऐसे हुए
हमसे
अनजाने में,
फूलों 🌿🌷का
क़त्ल कर बैठे
🤝पत्थरों को
मनाने में....👐
🔥दामन जलाया
हमने हवा से...💨
ख़ुशबू को पाने में
ऋत भी पतझड़ों की🌱
आ गईं बहारों के
बे-सबब इन्तज़ार में..🌵
काश कि हम लगाते
दिल अपना ईश्वर से💔
पाते कुछ तो सिला
हम इसी फ़ानी ज़िंदगी में....
✍️🌴🌹🌲🙏🌲🌹🌴✍️