My New Poem...!!!
जब छोटे थे तब जल्दी-से
बड़े होने की बड़ी चाहत थी।
पर अब जाँ के पता चला कि:
वही अधूरे एहसास और टूटे
सपनों से; वह अधूरे होमवर्क
और टूटे खिलौने ही अच्छे थे
बारिश के पानी की काग़ज़ी
नाव रात सितारों की गिनती
परियों की कहानीयाँ अच्छी थी
गिल्ली दंडी, छुपा-छुपीं अच्छी थी..!
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