पहली बार आज
यकीन नहीं है हो रहा।
चंद लोग के मृत्यु पर
कैसे जग खुश हो रहा?
सच तो यह है
जो कल होना था
वो आज देखो हो रहा।
गर यूँ ही न्याय वक्त पर
निर्भया के संग होता।
तो शायद आज किसी
बाला का चीर हरण न होता।
भविष्य में कोई ना करे
किसी स्त्री संग दुराचार ।
न्याय व्यवस्था गर
हो जाए सख्त।
फिर न कर पाए कोई
वक्त बे वक्त
नारी अस्तित्व तार तार।
?☺