"क्या अंकल जी" (लघुकथा)
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"अंकल जी! आपके पास अनवांटेड...... है?" एक खूबसूरत-सी 16-17 वर्षीया लड़की ने मेडिकल स्टोर के बुजुर्ग मालिक से पूछा|
"सॉरी! मैं ठीक से सुन नहीं सका|"
"अनवांटेड....... है?" नवयौवना ने दोहराया।
स्टोर मालिक ने अपने कारिंदे को गोली देने का आदेश दिया|
"पानी कहाँ रखा है?" नवयौवना का अगल प्रश्न था|
"सॉरी, आज वाटर सप्लायर पानी नहीं दे गया|"
"क्या अंकल जी! आपको पानी का इंतज़ाम करके रखना चाहिए| किसी को एमरजेंसी में टैबलेट लेनी हो तो?" कहते हुए उसने पैसे दिए और जल्दी से निकल गयी|
लड़की के जाने के बाद वहीं खड़े एक ग्राहक ने स्टोर मालिक कहा, "क्या अंकल जी! उसने दवाई का नाम साफ़-साफ़ तो बोला था, मुझे भी साफ़ सुनाई दिया था|"
"मुझे भी पहली बारी में ही साफ़ सुनाई पड़ गया था| लेकिन उसने गोली ही ऐसी माँगी थी कि उसकी उम्र को देखते हुए दुबारा कन्फर्म करना जरूरी था| बाई चांस मैं सुनने में गलती कर गया होता तो गले का फंदा बनने में देर नहीं लगती, आखिर जागरूक लड़की थी|....." (ग्राहक ने प्रश्न सूचक निगाहें स्टोर मालिक पर डालीं|) ".......आजकल की युवा पीढ़ी बड़ी समझदार हो गयी है, वह डबल प्रॉटेक्शन बरतती है| अभी दो-ढाई घंटे पहले के लड़का डबल कॉन्डम लेकर गया था, अब यह लड़की गर्भ निरोधक गोली लेकर गयी है|"
- विजय 'विभोर'
19/11/2019