हरसाल कुछ तो हैवानियत के किस्से दर्ज होते ही हैं और अगले साल वो ही किस्से दफ़न भी हो जाते हैं । दिल को थोडासा ही लेकिन सुकून था कि इस साल हैवानियत नही दोहराई गए लेकिन डर भी था क्योंकि इस साल को खत्म होने में कुछ दिन बाकी थे अभी, पता नही था कि हैवानियत के आगे इंसानियत ही खत्म हो जाएगी ये साल खत्म हो या ना हो जख्म काफी गेहरा छोड़ गया ।
_हेतु?