***मोमबत्ती की अपील***
ओये! मोमबत्ती इधर ला
भाई ज़रा इसमें माचिस लगा
ले भाई तू भी एक ले
जला इसे और एक सेल्फी ले।
आजकल ये हो रहा है मेरे साथ...
और लोग कह रहे हैं
सती प्रथा खत्म हो गयी
वर्षों पहले।।
जबकि हकीकत ये है कि
मुझे जलाया जाता है रोज़
कभी चौराहे पर
कभी घरों में
दुकानों में, स्कूलों में
पार्कों में, अस्पतालों में
उत्पीड़न तो मेरा हो रहा है
हत्या तो मेरी हो रही है।।
सीमा पर कुछ हुआ तो
जलाओ भई मोमबत्ती
बलात्कार कहीं हुआ तो
जलाओ भई मोमबत्ती।।
और तो और...
मेरी बहन अगरबत्ती
उसको भी कभी भी, कहीं भी
सुलगा देते हैं लोग।
मेरा भाई दीपक
बेचारा जलता रहता है
और ये निकम्मी सरकारें
और जाहिल जनता
जलाती रहती है हमें
और हमारे परिवार को।।
हमारी कोई नहीं सुनता
हमारे लिए कोई आवाज़ नहीं
कोई आंदोलन नहीं।
हम पीड़ित हैं वर्षों से
दलित हैं जन्मों से
अरे कभी हमारी जगह
जला के देखो उन दोषियों को
शायद हमारा परिवार बच जाए।।
- सिराज अंसारी