।। नर्मदे हर।।
माई की कृपा
जीवन के इस पथ पर
इक दौर वो भी देखा
जहां कुछ अभावों में भी लोगों को हंसते देखा
जीवनदायिनी मां रेवा की कृपा को साक्षात बरसते देखा
मां के आंचल में उसके बच्चों को पलते देखा
मां रेवा के किनारों पर छोटे छोटे बच्चों को बालू के घरौंदे बनाते देखा
कल-कल बहती मां नर्मदा की धारा में जैसे हजारों बजते वाद्य यंत्रों से निकलते संगीत में रमते परिक्रमा वासियों को देखा
ब्रह्रम मूहूर्त की सितारों भरी रात में बर्फ से ठंडे नर्मदा जल में "हर हर नर्मदे" की डुबकी लगाते देखा
दीपों की रोशनी से रोशन हुआ ,मंदिरों की घंटियों से गुंजायमान हर तट देखा
वरदायिनी मेकलसुता का प्रताप देखा
सूखी बंजर भूमि पर जीवन को पनपते देखा
खेतों को मैया के जल से लहलहाते देखा
कल-कल बहते झरनों को देखा,सूखे कंठो की प्यास बुझाते देखा
आज जहां कुछ जाने पहचाने से कुछ ज्यादा अपने से लगने वाले भी पराये से हो जाते हैं
वहां मां शांकरी के आशीर्वाद से अनजानों को अपना बन के गले लगाते देखा
परिचित को अपरिचित और वो अपरिचित को परिचित होते देखा
कहीं गांव के लोगों में, तो कहीं मंदिर के सेवकों,तो कहीं नैया पार लगाने वाले केवट में माई की अप्रतिम छवि को देखा
हर घर हर आंगन में मां की भक्ति में भक्तों को झूमते देखा
मैया के तट पर हर कंकर को शंकर(नर्मदेश्वर) बनकर पुजते देखा
माता रानी के दीवानों को नंगे पांव तपती दुपहरी में पत्थरों पर हंसते हंसते चलते देखा
साधु संतों की वाणी से मां नर्मदा की अमृत सी महिमा को गाते देखा
अमरकंटक में मैया का भोला सा रूप देखा
तो रतनासागर में मां का विराट स्वरूप देखा
"नर्मदा मैया की जय हो" कहने वालोें को न थकते देखा
हर मोहल्ले गांव शहर में " नमामी देवी नर्मदे"
से धरती और आकाश को गूंजते देखा ।
।।नर्मदे हर।।