દરેક ભાષાનું એક આગવું મહત્વ હોય છે. સંકૃત અલંકારોથી અને ઉર્દુ તેની નજાકતથી શોભે છે.
ઉર્દુની નજાકતનો એક નમૂનો. લગ્ન અને મરણ. જીવનના બે મહત્વના પ્રસંગો,
વિભીન્નતાનો સુંદર નાજુક સમન્વવય.
"નિકાહ અને જનાજો"
“फर्क सिर्फ ईतना सा था”
तेरी डोली उठी
मेरी मैयत उठी
फुल तुज पर भी बर्से
फुल मुज पर भी बर्से
फर्क सिर्फ ईतना सा था
तुजे सजाइ गई
मुजे सजाया गया
तु भी घर को चली
मैं भी घर को चला
फर्क सिर्फ ईतना सा था
तु उठ के गयी
मुजे उठाया गया
महेफील वहां भी थी
लोग यहां भी थे
फर्क सिर्फ ईतना सा था
उनका हंसना वहां
इनका रोना यहां
काजी उधर भी था
मौलवी ईधर भी थे
दो बोल तेरे पढे
दो बोल मेरे पढे
तेरा निकाह पढा
मेरा जनाजा पढा
फर्क सिर्फ ईतना सा था
तुजे अपनाया गया
मुजे दफनाया गया