आँखे को पढ़ने का शोख हैं मुझे लेकिन एक मर्तबा आपकी आँखे क्या देखली ख़ुदा कसम ना किसिकी आँखो को देखने का मन करता हैं ,नाही किसिकी आँखो को पढ़ने को जी चाहता हैं ,मानो की जैसे आपकी आंखों की रंगत उस मकड़िकी जाल की तरह हैं जो एक बार फस जाए वो निकल नही पाते और हम है कि आपके आँखो के नुर से निकलना नही चाहते।
_हेतु✍