तेरी मेरी कहानी
हर याद पुरानी लिखूँगी
आँखों का पानी लिखूँगी
हाँ....आज मैं तेरी मेरी
कहानी लिखूँगी।
आँखों की नमी तुम हो
होंठों की हँसी तुम हो
गुज़ारी है हमने जो हर पल
उस ज़िन्दगी की कमी तुम हो।
तेरी यादें, तेरी बातें
तेरी खुशबू, तेरा एहसास
तेरे सिवा बाक़ी कुछ और नहीं
शामिल मुझमें सिर्फ तुम हो।
माना मेरा इश्क़ ना था
तेरे क़ाबिल कभी
ख़ो कर तुझको, तुझसे जो की
मेरी वो आशिक़ी तुम हो।
अधूरी रह गई मेरी जो दुआ
टूटा हुआ वो एक ख़्वाब मेरा
रूह कर दी जिसमें फ़ना
मेरे इश्क़ की वो बंदगी तुम हो।
ख़ोकर तुझको पा लिया मैंने
ख़्वाहिश बाक़ी अब कुछ भी नहीं
मेरी अधूरी मोहब्बत की
मुकम्मल दास्तान तुम हो।
✍? शिल्पी सक्सेना