किस कश्मकश में पड़ी है ए जिंदगी ;
ए कैसे उनको समजाएँ ??
किस उलजन में पड़ी है आज ये बातें
ये खुद समजे या उनको समजाये !!
क्या सही : क्या गलत है :
कुछ समज मे नही आता ।।
दिल और दिमाग अब
अपने ही बस में नही आता ।।
क्या सुनाये उनको : क्या जताए उनको
यही समज में नही आता ।।
दो कश्ती में सवार है हम डूबना तो तय है।
दिल और दिमांग की बीच की लड़ाई में
अब जिंदगी का हारना तो तय है ।
Dr.Divya