समीप हमारे रहकर भी,
हो हमसे इतनी दूर।
कि-हम तो आपके,
सिर्फ दीदार ही कर सकते है।।
और देख तेरी इन हंसीं अदाओं को।
हम तड़फते रहते है।।
गर चली गई सनम,
तुम यहां से भी दूर।
तो ना जाने ईस "रमेश" की,
क्या हालत होगी।।
ऐ जाने वफा प्यार मेरे,
तड़फते तो हम आज भी है।
बाद में तो तेरी,
सिर्फ यादें ही साथ होंगी।।