!! गजल !!
गजब की है मुस्कान तेरी गजब कीअदाकारी है।
ढला हर अंग सांचे में ,गजब की कलमकारी है ।।
तेरी इन झील सी आंखों में रहबर डूब जाएंगे ,
खुदाया खैर करना तू ,गजब की चित्रकारी है ।।
इन कातिल निगाहों की जरा सरगोशियां देखो,
कहर ढाते हुए नैना , अजब सी छाई खुमारी है ।।
गुलाबों की लाली से ,लबरेज अधरों को देखो ,
बिना मोल बिक जाए, यह कैसा व्यापारी है ।।
इस पाषाण प्रतिमा को गजब का रूप दे डाला ,
यह मलिका हूर है कोई या गजब की कलाकारी है।।
!! नमिता गुप्ता !!