पत्र मिला
लिखा है ,
बर्फ पिघल चुकी है
हरी घास उग आयी है
घुघुती की खुशी,
फूलधैयी की रौनक
काफल का जिगर
पत्र में डला हुआ है।
एक बात और लिखी है
जिसे पढ़ नहीं पा रहा
कि "तुमसे प्यार है"
समय की फड़फड़ाहट में
इस दौड़ -भाग में
लिखा दिख नहीं रहा है ।
~महेश रौतेला