ऐ चांद और तारे क्यों लगते हैं आज मुझे प्यारे ।
एक तक आसमान मे मैं देखूं ,
लगते है मुझे ये सपने सारे ।
बचपन में जिनको देखा मैंने
लगते हैं वह अरमान सारे ।
आज इन बच्चों की आंखों से ,
फिर से देखें मैंने वह अरमान सारे ।
जिन्हें पूरा करने के लिए ,
मेरे चांद तारों ने भरी है उड़ान ,
क्षितिज के आगे ।