जागरूकता
यह बात लगभग तीस वर्ष पुरानी है जब कोलकाता में हिंदुस्तान मोटर्स का एंबेस्डर कार बनाने का कारखाना हुआ करता था। उस कारखाने के मालिक बिड़ला जी एक बार दमदम एयरपोर्ट पर अपने विमान के निर्धारित समय से पहले आ जाने के कारण अपनी गाड़ी आने का इंतजार कर रहे थे। उन्होने मन में सोचा कि समय क्यों बेकार नष्ट किया जाए। आज टैक्सी लेकर आफिस चले जाते है और उन्होने ऐसा ही किया और वे टैक्सी में रवाना हो गया।
रास्ते में बिडला जी ने समय व्यतीत करने के लिए टैक्सी ड्राइवर से बातचीत शुरू की, बातचीत के दौरान पता हुआ कि वह टैक्सी वाला उच्च शिक्षित व्यक्ति था जो कि नौकरी ना करके अपने स्वयं के व्यवसाय में रूचि के कारण यह कार्य कर रहा था। उन्होने चर्चा के दौरान महसूस किया कि गाडी अत्याधिक आवाज कर रही थी एवं बैठने पर कंपन भी महसूस हो रहा था। उन्होने ड्राइवर से कहा कि क्या तुम गाड़ी की उचित देखभाल नहीं करते हो जिस कारण इतनी आवाज कर रही है। तब वह टैक्सी ड्राइवर बोला कि यह गाडी अभी पिछले हफ्ते ही मैंने नई खरीदी है। उसके यह कहने पर कि उसका अनुभव है कि इस कार में हार्न के अलावा और सब कुछ आवाज करता है। इसमें ऐसी कोई विशेषता नहीं है, जिसके लिए इसकी तारीफ की जा सके। यह तो मजबूरी है कि और कोई कार उपलब्ध ना होने के कारण हमें यही खरीदना पड़ती है। यह सुनकर बिडला जी को मन ही मन बहुत दुख हुआ।
इस वार्तालाप के दौरान ही उनका आफिस आ गया और वे उतर गये। उन्होंने अपने निजी सचिव को बुलाकर निर्देश दिया कि उनके निजी उपयोग के लिए जो गाड़ी कंपनी से आज ही भेजी गयी है उसकी चाबी इस व्यक्ति को दे दी जाए एवं गाडी का रजिस्ट्रेशन भी इस व्यक्ति के नाम करवाकर यह गाड़ी इसे सौंप दी जाए। इतना कहकर वे तेजी से अपने आफिस की ओर चले गए। वह टैक्सी ड्राइवर यह सब देखकर आश्चर्यचकित हो गया और उसने उस कर्मचारी से पूछा कि यह साहब जो मेरी टैक्सी से उतरे हैं वे कौन है ? जब उसे पता हुआ कि वे इस कंपनी के मालिक है तो उसकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गई। कुछ समय बाद वह उनके प्रति धन्यवाद व्यक्त करता हुआ और उनके स्वभाव की प्रशंसा करता हुआ चला गया।
इस घटना के बाद बिडला जी ने कंपनी सारे अधिकारियों की मीटिंग ली और उन्हें अपने अनुभव से अवगत कराया और उत्पादन की गुणवत्ता के सुधार हेतु कडी हिदायत दी जिससे कंपनी की कार्यप्रणाली में जागरूकता आकर कार्य की गुणवत्ता में काफी सुधार हो गया।