उपकार
कोलकाता महानगर में मदिरा की एक दुकान के सामने एक व्यक्ति अधिक मदिरा के सेवन के कारण सडक पर पडा अर्धविक्षिप्त अवस्था में लोट रहा था। उसके आसपास आने जाने वाले उसे देखकर हंसकर उसका मजाक उड़ाते हुए चले जाते थे, परंतु कोई भी उसकी मदद करने के लिए आगे नही आ रहा था। उसी समय एक लड़का वहाँ से गुजरा यह दृष्य देखकर द्रवित होकर उसने उस व्यक्ति को उठाकर किसी तरह पास ही के अस्पताल में ले गया। वहाँ उसे चिकित्सा कक्ष में ले जाकर चिकित्सक ने उसका इलाज षुरू कर दिया। चिकित्सक ने उस लडके को बताया कि यदि थोडी देर और हो जाती तो इसकी जान बचाना मुष्किल था। तुमने बहुत परोपकारी कार्य किया है। तुम्हारे इस प्रषंसनीय कार्य को देखते हुए मैं तुम्हें कुछ रूपये इनाम में देना चाहता हूँ। इतना कहते हुए चिकित्सक ने अपना पर्स निकाला और उसमें से कुछ रूपये निकालकर उसे देना चाहा तभी वह बोला कि मैंने अपना फर्ज निभाया है, इसलिये मुझे किसी भी प्रकार की धनराषि लेने की आवष्यकता नही है। उसकी बात सुनकर वह चिकित्सक बहुत प्रभावित हुआ और उससे उन्होंने पूछा कि मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ। उस लडके ने विनम्रतापूर्वक कहा कि मुझे नौकरी की नितांत आवष्यकता है मेरे घर में एक बूढी माँ और मेरी बहन है एवं हम आर्थिक कठिनाईयों में रह रहे है। यह सुनकर डाॅक्टर ने उसे अपने यहाँ नौकरी दे दी और धीेरे धीरे उसे षिक्षा दिलाते हुए कंपाऊंडर की डिग्री दिला दी। उसे अपने ही चिकित्सालय मंे कंपाऊंडर की नौकरी देकर उसे स्वावलंबी बना दिया। वह भी आजीवन उनके यहाँ ही नौकरी करता रहा। इसलिये कहते है कि परोपकार का कार्य करने से कही ना कही ईष्वर की कृपा व्यक्ति पर हो जाती है।