नेता जी
एक दिन शहर के एक धार्मिक स्थल पर रात में किसी शरारती तत्व द्वारा गंदगी फेंक दी गई और अवांछनीय पोस्टर भी धर्मस्थल पर चिपका दिये गये। दूसरे दिन सुबह जब धर्मावलंबियों ने यह देखा तो वे आगबबूला हो गये एवं दूसरे धर्म के धर्मावलंबियो पर यह निंदनीय कृत्य करने का आरोप लगाने लगे। दोनो धर्मावलंबियों के बीच देखते ही देखते वाद विवाद बढने लगा और आपस में मारपीट की स्थिति निर्मित होने लगी। उसी समय क्षेत्र के एक नेताजी दौड़े-दौड़े वहाँ पर आये और पूरा माजरा जानने के बाद दोनो पक्षों को समझाइश देने लगे एवं आपसी सद्भाव और एकता पर लंबा चौडा उद्बोधन दे दिया। इससे प्रभावित होकर दोनो पक्षों ने गंभीरतापूर्वक मनन किया की यह किसी शरारती तत्व द्वारा किया गया निंदनीय कृत्य है जिसका उद्देश्य दोनो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाना था। अब नेताजी ने वहाँ साफ सफाई कराकर दोनो पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाकर वहाँ से चले गए। वहाँ पर उपस्थित सभी लोग नेताजी की सक्रियता से बहुत प्रभावित थे। रात के अंधेरे में एक व्यक्ति चुपचाप अकेले नेताजी के घर आकर उन्हें बधाई देते हुए बोला कि आपका काम हो गया है। अब आपकी चुनाव में जीत सुनिश्चित है। नेताजी ने भी मुस्कुराकर उसे नोटो की गड्डी दी और अगले सप्ताह दूसरे मोहल्ले में ऐसा ही कृत्य करने का निर्देश दे दिया।