"सिर्फ राम है"
सारा जग है प्रेरणा प्रभाव सिर्फ "राम" है,
भाव सूचियां बहुत है भाव सिर्फ राम है,
राजपाट त्याग पुण्य काम की तलाश में,
तीर्थ खुद भटक रहे है धाम की तलाश में,
ना तो धाम ना किसी ही नाम की तलाश में,
राम वन गए थे अपने राम की तलाश में,
आपसे ही आपका चुनाव सिर्फ राम है,
भाव सूचियां बहुत है भाव सिर्फ राम है,
ढाल में ढले समय की शस्त्र ढले सदा,
सूर्य थे मगर वो सरल दीप से जला सदा,
ताप में तपे स्वयं की स्वर्ण से गले सदा,
राम ऐसा पथ थे जिस पर राम ही चले सदा,
दुख में भी अभाव का अभाव सिर्फ राम है,
भाव सूचियां बहुत है भाव सिर्फ राम है,
ऋण थे जो मनुष्यता के वो उतारते रहे,
जन को तार ते रहे तो मन को मारते रहे,
एक भरी सदी का दोष खुद पे धारते रहे,
जानकी तो जीत गई सदा राम हारते रहे,
दुख की सब कहानियां है घाव सिर्फ राम है,
भाव सूचियां बहुत है भाव सिर्फ राम है,
सब के अपने दुख थे सबके सारे दुख छले गए,
वो जो आस दे गए थे वो ही सांस ले गए,
रामराज की ही आस में ही दीये जले गए,
रामराज आ गया तो राम ही चले गए,
हर घड़ी नया नया स्वभाव सिर्फ राम है,
भाव सूचियां बहुत है भाव सिर्फ राम है,
जग की सब पहेलियों का देके केसा हल गए,
लोगो के जो प्रश्न थे वो शोक में बदल गए,
सिद्ध कुछ हुए ना दोष, दोष सारे टल गए,
सीता आग में न जली राम जल में जल गए।
जानकी का हर जनम बचाव सिर्फ राम है,
भाव सूचियां बहुत है भाव सिर्फ राम है।
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कवि अमन अक्षर की एक बेजोड़ कविता...
एक सुंदर रचना के लिए दिल से नमन.....
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