आत्मसंतोष
अपने आप में एक बड़ा शब्द है, इसकी जरूरियात आज के समय में सबको है, पर इसका मतलब सही मायनो में किसीको मालूम ही नहीं है, ना मुझे ना आपको, बस हर दम, हर पल इसकी ही खोज के लिए हम निकल पड़ते है, और मिलता है क्या ? सिर्फ थकान, निराशा ।
हम कुछ ना कुछ ऐसा करना चाहते है जिससे हमें आत्मसंतोष प्राप्त हो, मगर आत्मसंतोष किस चीज़ में छुपा है कोई नहीं जनता । मेरा मानना है की यदि सही मायनो में आप आत्मसंतोष की खोज में है तो वह आपको आपके भीतर ही मिलेगा, उसके लिए आपको कही जाने की जरूरत नहीं है, सुबह से लेकर शाम तक ऐसे काम कीजिये जो आपकी आत्मा को लज्जित ना करे, किसीका दिल न दुखाये, किसीसे छल कपट ना करे, रात को जब आप अपने बिस्तर पर सोने के लिए जाओ तो पुरे दिन के चित्र को याद करे और उस घटना में आपने किसीको दुःख तो नहीं पहोचाया ? यह बात भी याद कीजिये, अगर गलती से ऐसा हो गया हो तो आप अगले दिन उस घटना को बहेतर करने की कोशिश कीजिये, जितना हो सके उतना लोगों के प्रति सहानुभूति रखिये, हो सके तो हमेशा मुस्कुराते रहिये, क्योंकि आपकी मुस्कराहट देखकर शायद कोई दुखी व्यक्ति अपना दुःख पलभर के लिए भूल जाए । सब से हँसकर बाते कीजिए, यदि आपसे कुछ बन सकता हे तो दिन में एकबार ही सही किसीकी मदद कीजिये, देखना आपको आत्मसंतोष जरूर मिलेगा । किसीकी ख़ुशी का कारण बनना अपने आपमें एक नई ऊर्जा जगाता है।
आत्मसंतोष इन्ही छोटी छोटी बातो में बसा हुआ होता है और हम मनुष्य ना जाने किन किन चीज़ों में इसे ढूंढते रहते है ।
यह मेरा विचार है, शायद आपके विचार इससे अलग भी हो सकते है ।
#श्याम